दुकान का स्टॉक और एक्सपायरी कैसे संभालें: कम नुकसान का तरीका
स्टॉक में पैसा फंसा रहता है। ज़्यादा माल रखें तो पैसा रुकता है, कम रखें तो ग्राहक लौट जाता है, और एक्सपायरी हो जाए तो सीधा नुकसान होता है।
स्टॉक के लिए 5 नियम
- हर माल की एंट्री करें: कितना आया, किस भाव पर, किस सप्लायर से।
- न्यूनतम मात्रा तय करें: हर तेज़ बिकने वाले सामान की एक सीमा रखें जिसके नीचे जाते ही मंगाना है।
- FIFO: जो पहले आया वह पहले बेचें।
- हर हफ्ते गिनती: कुछ सामान की असली गिनती और रजिस्टर का मिलान करें।
- धीमे माल पर छूट: जो नहीं बिक रहा, उसे ऑफर में निकालें।
एक्सपायरी से बचें
- आते ही एक्सपायरी तारीख दर्ज करें।
- 3 महीने पहले से सूची देखें।
- पास की तारीख वाला माल सामने रखें या ऑफर दें।
- दवा या खाने का सामान एक्सपायर होने के बाद न बेचें।
सॉफ्टवेयर में
Tejas Billing App में खरीद की एंट्री में सप्लायर और एक्सपायरी दर्ज होती है, एक्सपायरी रिपोर्ट बनती है और सामान कम होने पर कम-स्टॉक अलर्ट दिखता है। हर बिक्री पर स्टॉक अपने आप घटता है।
Tejas Technology के सॉफ्टवेयर से यह सब आसान होता है। सखी MIS (SHG) · Tejas Billing App (दुकान का बिलिंग)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कम-स्टॉक अलर्ट कैसे काम करता है?
आप हर सामान की न्यूनतम मात्रा रखते हैं। स्टॉक उससे नीचे जाते ही वह सामान अलर्ट सूची में दिखने लगता है।
क्या मेडिकल दुकान के लिए एक्सपायरी ट्रैकिंग है?
हां, बैच और एक्सपायरी तारीख के साथ एक्सपायरी रिपोर्ट मिलती है।