SHG में आंतरिक ऋण और ब्याज कैसे तय करें और गिनें
आंतरिक ऋण SHG की जान है: सदस्य अपनी ही बचत से ज़रूरत पर ऋण लेते हैं। इसके नियम समूह सबकी सहमति से तय करता है और लिखकर रखता है।
1. नियम पहले तय करें और लिख लें
- ऋण किस काम के लिए मिलेगा (आजीविका, इलाज, शिक्षा आदि)
- एक सदस्य को अधिकतम कितनी रकम
- ब्याज दर और वह मासिक है या वार्षिक, और घटते बैलेंस पर लगेगी या नहीं
- वापसी की अवधि और किस्त कब-कब
- देर होने पर क्या किया जाएगा
2. ब्याज की गणना
समूह जो भी तरीका चुने, उसे सब सदस्यों को समझाकर रखें और हर बार एक ही तरीके से गिनें। उदाहरण के लिए, अगर ब्याज मासिक घटते बैलेंस पर है तो हर महीने बचे हुए मूलधन पर ब्याज बनेगा। दर और तरीका आपका समूह तय करता है, कोई तय सरकारी दर हर समूह पर लागू नहीं होती।
3. हर ऋण में यह लिखें
- सदस्य का नाम, तारीख, रकम और उद्देश्य
- ब्याज दर और अवधि
- किस्त की सूची
- हर वापसी की तारीख और रकम, कितना मूलधन और कितना ब्याज
- बचा हुआ बकाया
4. सावधानियां
- ऋण बैठक में सबके सामने दें, अकेले में नहीं।
- किस्त चूकने पर पहले बात करें, बाद में नियम के अनुसार आगे बढ़ें।
- ऋण की वापसी का रिकॉर्ड बैठक में ही दर्ज करें।
सखी MIS में ऋण, ब्याज और किस्त का हिसाब अपने आप बनता है और हर सदस्य की पासबुक में दिखता है, जिससे गणना की गलतियां घटती हैं।
Tejas Technology के सॉफ्टवेयर से यह सब आसान होता है। सखी MIS (SHG) · Tejas Billing App (दुकान का बिलिंग)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
SHG में ब्याज दर कितनी होनी चाहिए?
कोई एक तय दर नहीं है। समूह अपनी बैठक में सबकी सहमति से तय करता है। बैंक या मिशन के निर्देश हों तो उनका पालन करें।
आंतरिक ऋण की किस्त कैसे गिनें?
रकम और अवधि के हिसाब से किस्त तय करें और हर किस्त में मूलधन और ब्याज अलग लिखें। सॉफ्टवेयर यह अपने आप कर देता है।