SHG का हिसाब-किताब कैसे रखें: आसान तरीका
स्वयं सहायता समूह (SHG) की ताकत भरोसे में है, और भरोसा सही हिसाब से बनता है। यह गाइड बताती है कि रजिस्टर क्या रखें, बैठक में क्या लिखें और गलतियों से कैसे बचें।
1. ज़रूरी रजिस्टर
- उपस्थिति और कार्यवृत्त रजिस्टर: हर बैठक की तारीख, कौन आया, क्या फैसले हुए।
- बचत रजिस्टर: हर सदस्य की हर बैठक की बचत और कुल जमा।
- आंतरिक ऋण रजिस्टर: किसे कितना ऋण मिला, ब्याज दर, किस्त और बकाया।
- रोकड़ बही (कैशबुक): बैठक में आई और गई हर रकम।
- बैंक पासबुक: बैंक में जमा और निकासी का मिलान।
2. हर बैठक में यह क्रम रखें
- उपस्थिति लें।
- बचत ली गई रकम सबके सामने पढ़ें और लिखें।
- ऋण की किस्त और ब्याज की वसूली दर्ज करें।
- नया ऋण देना हो तो उसका कारण, रकम और अवधि सबकी सहमति से लिखें।
- कैशबुक का योग करके हाथ में नकद से मिलान करें।
- कार्यवृत्त पर उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर या अंगूठा लगवाएं।
3. आम गलतियां
- बैठक के बाद हिसाब लिखना, जिससे भूलें होती हैं।
- ब्याज की गणना अलग-अलग तरीके से करना।
- रजिस्टर सिर्फ एक व्यक्ति के पास होना, जिससे पारदर्शिता घटती है।
- बैंक पासबुक और कैशबुक का मिलान न करना।
- रजिस्टर का फटना, खोना या भीग जाना।
4. डिजिटल हिसाब से क्या बदलता है
डिजिटल सिस्टम में योग और ब्याज अपने आप निकलते हैं, हर सदस्य की पासबुक हमेशा उपलब्ध रहती है और रिपोर्ट एक क्लिक में बन जाती है। सखी MIS में समूह चाहे तो सदस्य केवल देखने वाले लॉगिन से अपना हिसाब खुद देख सकती हैं, इससे पारदर्शिता बढ़ती है। आधार का केवल अंतिम 4 अंक लिया जाता है।
फिर भी कागज़ के रजिस्टर या बैंक के नियम जो आपके विभाग या बैंक ने मांगे हों, उन्हें वही रखें जो वे कहें। इस गाइड को अपने बैंक/NRLM अधिकारी के निर्देशों के साथ मिलाकर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
SHG में कितने रजिस्टर ज़रूरी होते हैं?
आम तौर पर उपस्थिति और कार्यवृत्त, बचत, ऋण, रोकड़ बही और बैंक पासबुक। आपके बैंक या विभाग की अपनी सूची हो तो वही मानें।
क्या SHG का हिसाब मोबाइल पर रख सकते हैं?
हां, सखी MIS जैसे सॉफ्टवेयर में बचत, ऋण और बैठक मोबाइल पर दर्ज होते हैं और रिपोर्ट अपने आप बनती हैं।